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Thursday, May 29, 2008

यह कौन है वैश्य बिरादरी का ठेकेदार?

आज मैंने अखबार में पढ़ा कि समाजवादी पार्टी का एक नेता बहुजन समाज पार्टी में दाखिल हो गया है. समाचार पूरा पढ़ कर पता चला कि यह नेता बिक गया है. काफ़ी कीमत दे कर ख़रीदा है इसे मायावती ने. उस कीमत की लिस्ट देखिये - एक, आने वाले लोक सभा चुनावों में फरुखाबाद से टिकट, दो, उस के बेटे के लिए हरदोई से उत्तर प्रदेश विधान सभा का टिकट, तीन, राष्ट्रिय जनरल सेक्रेटरी का पद. यह नेता है नरेश अग्रवाल. भारतीय राजनीति पर एक कलंक. यह बिके हुए नेता प्रदेश और देश का दोनों का बंटाधार करेंगे.

अब बदले में यह बिका नेता पार्टी को क्या देगा? उस ने मायावती से बायदा किया है कि वह वैश्य बिरादरी के सारे वोट उन्हें दिलवाएगा. उसने मायावती को अगला प्रधान मंत्री और देश का रक्षक कर्णधार भी कहा है. भारतीय राजनीति पर एक कलंक होने के साथ-साथ यह व्यक्ति वैश्य बिरादरी पर भी कलंक है. किस ने अधिकार दिया इसे वैश्य बिरादरी के वोटों पर? है कौन यह व्यक्ति? मैं एक वैश्य हूँ, मैं इसे नहीं जानता, मैं ऐसे किसी व्यक्ति को वैश्य ही नहीं मानता. यह तो बिकाऊ माल है, जिन्हें जो मर्जी खरीद ले. आज कोई और पार्टी इस से अच्छी कीमत दे दे तो यह उस के हाथ बिक जायेगा, और उसके मालिक को अगला प्रधान मंत्री घोषित कर देगा.

वैश्य बिरादरी को चाहिए कि इसे और इस जैसे सभी बिके हुए राजनीतिबाजों को बिरादरी से बाहर निकाल दे. हुक्का पानी बंद होना चाहिए ऐसे घटिया लोगों का.