Monday, August 18, 2008

क्या इस देश के मुकद्दर में केवल समझौता सिंह ही लिखे हैं?

मैंने अपने एक मित्र से पूछा, 'अगर तुम प्रधान मंत्री बन गए तो सबसे पहला काम क्या करोगे?'
मित्र ने जवाब दिया, 'उन सारे रास्तों का चक्कर लगाऊँगा जहाँ अक्सर ट्रेफिक जाम में फंसता था. क्या मजा आएगा गुरु खाली सुनसान सड़कों पर ड्राइविंग का!'
'और दूसरा काम?' मैंने पूछा.
मित्र अत्यन्त उत्साह से बोला, 'सारे राष्ट्रिय राजमार्गों का चक्कर लगाऊंगा. जानते हो प्रधान मंत्री को टोल टेक्स माफ़ है'.
'और तीसरा काम?', मैं अधीरता से बोला.
'यह तुम बताओ, तुम्ही ने मुझे प्रधान मंत्री बनाया है', उसने गेंद मेरे कोर्ट में डाल दी.
'अरे भई अपने मंत्रीमंडल में किसे लोगे?' मैंने कहा.
'किसे लूँगा यह बादमें देखेंगे, पहले यह पूछो कि किसे नहीं लूँगा', वह मुस्कुराया.
'अच्छा चलो यही पूछा', मैं बोला.
'यार बड़ी लम्बी लिस्ट है. इन साठ सालों में ऐसे नेताओं की संख्या बहुत ज्यादा हो गई है जिन्हें में अपने मंत्रिमंडल में किसी हालत में नहीं ले सकता. अच्छे लोग तलाशने में काफ़ी समय लगेगा'.
'फ़िर सरकार कैसे चलेगी?', मैंने चिंता व्यक्त की.
'बाबू चलाएंगे', वह लापरवाही से बोला, 'यह साले मंत्री तो सिर्फ़ माल काटते हैं. असली सरकार तो बाबू चलाते हैं. सुप्रीम कोर्ट भी बाबुओं के सामने नतमस्तक होता है'.
'यह साझा सरकार है, समर्थन देने वाली पार्टियों के मालिक जिसे चाहेंगे मंत्री बनाना पड़ेगा, वरना सरकार एक दिन भी नहीं चलेगी'. मैंने उसे सावधान किया.
'न चले साली सरकार', वह बोला, 'मैं कोई समझौता सिंह हूँ क्या जो इन सालों की सुनूंगा'.
'यह तेरे ख़िलाफ़ अविश्वास प्रस्ताव ले आयेंगे', मैंने उसे डराया.
'ले आने दे सालों को अविश्वास प्रस्ताव. लोक सभा में सारी दुनिया के सामने नंगा कर दूँगा सालों को, और इस्तीफा स्पीकर की मेज पर पटक कर बाहर निकल जाऊंगा. यह कहते हुए वह कमरे से बाहर निकल गया.
'अरे सुन तो', मैं उस के पीछे भागा.
'किसी और को पकड़ ले प्रधान मंत्री बनने के लिए', और वह लो फ्लोर वाली बस में चढ़ गया.
मैंने ठंडी साँस ली, 'क्या इस देश के मुकद्दर में केवल समझौता सिंह ही लिखे हैं?'

4 comments:

राज भाटिय़ा said...

सुरेश जी,समझौता सिंह जी को आप ने नारज कर दिया, अब दुसरा ऎसा शरीफ़ ईमानदार समझौता सिंह कहा से लाओ गे.
धन्यवाद

शोभा said...

आज देश की यही दशा है। अच्छा लिखा है। बधाई

अनुराग said...

बड़ा मुश्किल ताज है साहब

Anil Pusadkar said...

achha chitran hai wartaman sthiti ka