भारत के आजाद होने के बाद नेहरु के नेतृत्व में अवसरवादी राजनीतिबाजों ने एक सोच का निर्माण किया. यह सोच था सेवा के नाम पर सत्ता की राजनीति. भारत को एक प्रजातंत्र घोषित किया गया पर तौर-तरीके सब उस राजतन्त्र के ही रखे गए जिस के अंतर्गत भारत पर अंग्रेजों ने लम्बे समय तक शासन किया. कुछ बदला तो सिर्फ इतना कि 'ब्रिटिश कालोनी भारत' का नाम बदल कर 'भारत गणराज्य' कर दिया गया. जिस सोच के अंतर्गत यह किया गया वह सोच आज भी नहीं बदला है. आज भी सेवा के नाम पर सत्ता की राजनीति हो रही है. अंग्रेज राजपरिवार की जगह नेहरु राजपरिवार ने ले ली है. नेहरु गए तो उनकी पुत्री इंदिरा आ गईं. वह गईं तो उनके पुत्र राजीव आ गए. राजीव गए तो उनकी विदेशी पत्नी आ गईं. उनके बाद उनके पुत्र राहुल के लिए राजगद्दी सुरक्षित रखी जा रही है. कुछ दिन पहले प्रधान मंत्री मनमोहन सिंह ने यह संकेत भी दे दिया कि जल्दी ही राहुल को पीएम उम्मीदवार घोषित कर दिया जाएगा.
दिल्ली चुनावों में कांग्रेस को जनता ने नकार दिया था, पर सत्ता के लालच में केजरीवाल की आम आदमी पार्टी (आआपा) ने कांग्रेस में जान फूंक दी और उसके समर्थन से अपनी सरकार बना ली. आजादी के बाद किसी पार्टी ने जनता को इतना बड़ा धोखा कभी नहीं दिया था. जो केजरीवाल कांग्रेस को सब से भ्रष्ट पार्टी कहते थे, जिन्होनें शीला जी के खिलाफ ३७० पेजों की चार्ज शीट बनाई थी, संसद मार्ग पुलिस पुलिस स्टेशन में शीला जी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई थी, अब शीला जी को ईमानदार घोषित कर रहे हैं. कुर्सी के लालच में अब आआपा कांग्रेस की 'एक प्राण दो शरीर' हो गई है.


