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अब इस में कोई संदेह नहीं रहा कि यह सरकार भ्रष्टाचार और भ्रष्टाचारियों के खिलाफ कोई सख्त कदम नहीं उठाएगी. इस सरकार का हर कार्य नागरिकों के खिलाफ और भ्रष्टाचारियों के पक्ष में होता है. अब जहाँ भी जब भी चुनाव हो, मतदाताओं को इस भ्रष्ट सरकार और इसकी साथी भ्रष्ट पार्टियों को हराना है. A Jan Lokpal Bill has been designed which has strong measures to bring all corrupt people to book. Voters should force politicians to enact this powerful bill. Take the pledge - "I hereby take a pledge that I will not vote for that party in next elections, which does not enact Jan Lokpal or Jan Lokayukta Bill wherever it is in power - whether it is in state or at centre. If Congress wants my vote, it should enact it in centre and in all states wherever it is in power. If any other party wants my vote, it should enact it in the states where it is in power."

Friday, January 14, 2011

चुनाव के नाम पर भ्रष्टाचार

साथ के फोटो पर क्लिक करे और पढ़ें, आप चौंक जायेंगे. लोग चुनाव के नाम पर राजनीतिक दल बना रहे हैं और फिर जम कर भ्रष्टाचार कर रहे हैं. दल बना कर वह किसी राजनितिक गतिविधि में हिस्सा नहीं लेते और एक तरह से निष्क्रिय राजनीतिक दल हैं वह यह दल बनाते हैं दान लेने और आय कर बचाने हेतु धांधली करने के लिए. वह इन दलों का पैसा स्टाक्स और जेवरात खरीदने के लिए इस्तेमाल करते हैं.

मुख्य चुनाव आयुक्त का कहना है कि चुनाव आयोग ने सरकार का ध्यान कई बार इन निष्क्रिय राजनीतिक दलों की और दिलाया है और इन दलों का नाम लिस्ट सकात देने का अधिकार माँगा है पर सरकार के कान पर जून तक नहीं रेंगी. ऐसा नहीं है कि सारे निष्क्रिय दल गड़बड़ कर रहे हैं पर ऐसे कई मामले सामने आये हैं जहाँ १५ लाख से ३५ लाख तक की रकमें इधर-उधर की गई हैं जिन्हें चुनाव आयोग गैर-राजनीतिक उद्देश्यों के लिए इस्तेमाल किया गया मानता है. सूचना अधिकार अधिनियम के अंतर्गत हासिल किये गए कागजातों से पता चला है की चुनाव आयोग वर्ष २००६ से सरकार को लाल झंडी दिखा रहा है पर सरकार को कोई चिंता नहीं है.

चुनाव आयोग ने वित्त मंत्रालय और सेन्ट्रल बोर्ड आफ डाइरेक्ट टेक्सेस को कुछ ऐसे दलों की जांच करने को भी कहा है. एक दल (परमार्थ पार्टी) को एक ही बार में १५ लाख रुपये मिले. दूसरे दल (राष्ट्रीय विकास पार्टी) को दो महीने में एक ही कम्पनी से एक बार ७५ लाख और फिर ५० लाख रुपये मिले.

सरकार क्यों चुप है, वह कोई जांच क्यों नहीं करना चाहती, वह इन दलों के खिलाफ कोई कार्यवाही क्यों नहीं करना चाहती, यह ऐसे सवाल हैं जिनका उत्तर सरकार को देना चाहिए. कहीं ऐसा तो नहीं कि सरकार में शामिल पार्टियों को इन दलों से कोई फायदा हो रहा हो.

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