
साथ के फोटो पर क्लिक करे और पढ़ें, आप चौंक जायेंगे. लोग चुनाव के नाम पर राजनीतिक दल बना रहे हैं और फिर जम कर भ्रष्टाचार कर रहे हैं. दल बना कर वह किसी राजनितिक गतिविधि में हिस्सा नहीं लेते और एक तरह से निष्क्रिय राजनीतिक दल हैं वह यह दल बनाते हैं दान लेने और आय कर बचाने हेतु धांधली करने के लिए. वह इन दलों का पैसा स्टाक्स और जेवरात खरीदने के लिए इस्तेमाल करते हैं.मुख्य चुनाव आयुक्त का कहना है कि चुनाव आयोग ने सरकार का ध्यान कई बार इन निष्क्रिय राजनीतिक दलों की और दिलाया है और इन दलों का नाम लिस्ट सकात देने का अधिकार माँगा है पर सरकार के कान पर जून तक नहीं रेंगी. ऐसा नहीं है कि सारे निष्क्रिय दल गड़बड़ कर रहे हैं पर ऐसे कई मामले सामने आये हैं जहाँ १५ लाख से ३५ लाख तक की रकमें इधर-उधर की गई हैं जिन्हें चुनाव आयोग गैर-राजनीतिक उद्देश्यों के लिए इस्तेमाल किया गया मानता है. सूचना अधिकार अधिनियम के अंतर्गत हासिल किये गए कागजातों से पता चला है की चुनाव आयोग वर्ष २००६ से सरकार को लाल झंडी दिखा रहा है पर सरकार को कोई चिंता नहीं है.
चुनाव आयोग ने वित्त मंत्रालय और सेन्ट्रल बोर्ड आफ डाइरेक्ट टेक्सेस को कुछ ऐसे दलों की जांच करने को भी कहा है. एक दल (परमार्थ पार्टी) को एक ही बार में १५ लाख रुपये मिले. दूसरे दल (राष्ट्रीय विकास पार्टी) को दो महीने में एक ही कम्पनी से एक बार ७५ लाख और फिर ५० लाख रुपये मिले.
सरकार क्यों चुप है, वह कोई जांच क्यों नहीं करना चाहती, वह इन दलों के खिलाफ कोई कार्यवाही क्यों नहीं करना चाहती, यह ऐसे सवाल हैं जिनका उत्तर सरकार को देना चाहिए. कहीं ऐसा तो नहीं कि सरकार में शामिल पार्टियों को इन दलों से कोई फायदा हो रहा हो.
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