बिहार चुनाव के परिणामों को हार-जीत के रूप में देखना उचित नहीं है. यह संकीर्ण मानसिकता का परिचायक है. चुनावों के माध्यम से बिहार की जनता ने अपने प्रतिनिधि चुने है. अब जो चुने गए हैं उन्हें जनता का ईमानदारी और संजीदगी के साथ प्रतिनिधित्व करना चाहिए. उनका हर काम ऐसा होना चाहिए जो यह सिद्ध करे कि वह जनता के विश्वास पर खरे उतरें हैं.
कांग्रेस - २४३ प्रत्याशी, ४ चुने गए.बीएसपी - २४१ प्रत्याशी, कोई नहीं चुना गया.
बामपंथी - १८५ प्रत्याशी, १ चुना गया.
एलजेपी - ७५ प्रत्याशी, ३ चुने गए.
आरजेडी - १६८ प्रत्याशी, २२ चुने गए.
कोई सबक सीखेंगे यह लोग ???
लालू तो लगता है कोई सबक नहीं सीखेंगे. उन्होंने चुनाव के नतीजों पर यह टिपण्णी की - मैं नितीश को सफलता के लिए वधाई देता हूँ, बीजेपी को नहीं.
कांग्रेस भी शायद कोई सबक नहीं सीखेगी क्योंकि राहुल को तो इस असफलता के लिए जिम्मेद्दार ठहराया नहीं जा सकता. जो ठहराएगा काम से जाएगा.
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